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मंगलम – शिवपुरी वर्ष 1981 में स्थापित एक सामाजिक संस्था है। इसकी स्थापना शिवपुरी-गुना के तत्कालिक लोकसभा सांसद कै० महाराजा श्रीमंत माधवराव जी सिंधिया एवं तत्कालीन कलेक्टर श्री डी. एस. माथुर जी IAS (पूर्व टेलीकॉम सचिव भारत सरकार) द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। संस्था शिवपुरी जिले की सज्जनशक्ति का समुच्चय है । आरंभ में समाज के प्रतीष्ठित जनों ने इसे जनभागीदारी मॉडल पर खड़ा किया था ।
वर्ष 2017 तक शिवपुरी जिले के कलेक्टर ही इस संस्था के पदेन अध्यक्ष रहते आये है। अभी तक कुल 26 जिला कलेक्टर शिवपुरी इस संस्था को अपने अध्यक्षीय आशीष से अभिसिंचित करते रहे है ।
संस्था का मुख्यालय भवन जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के नजदीक, पोलो ग्राउण्ड के सामन, कोर्ट रोड, शिवपुरी म. प्र. पर स्थित है।

प्रबंधन समिति

मंगलम् -शिवपुरी परंपरागत एनजीओ से हटकर सामुदायिकता की भावना आधारित सामाजिक संगठन है। वर्तमान में इसके 1260 आजीवन सदस्य, 07 संरक्षक सदस्य एवं 02 मंगलदानी सदस्य है। इन सदस्यों में समाज के हर वर्ग का कार्यशील प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ है। जिसमें राजनीति, प्रशासन, उद्योग, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा, वित्त, समाजकार्य, विधि, अभियांत्रिकीय, सिविल सोसायटी क्षेत्रों के प्रतिष्ठित जन मंगलम् – शिवपुरी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े है ।
संस्था का परिचालन 25 सदस्यी प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है। जिसका निर्वाचन प्रति तीन वर्ष में सभी आजीवन सदस्यों के मध्य से खुली, पारदर्शी एवं विधिक चुनाव प्रक्रिया माध्यम से किया जाता है।
• डॉ. गोविंद सिंह वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष है। आप एम. एस (आर्थो ) है । प्रदेश के काबिलतम अस्थि रोग सर्जन के रूप में आपकी पहचान है। आप एक दशक तक शिवपुरी जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन रहने के साथ शिवपुरी मेडीकल कालेज के संस्थापक अधीक्षक रहे हैं।
• इंजी. राजेन्द्र मजेजी वर्तमान में संस्था के सचिव है। आप वर्ष 1993 से इस पद पर कार्यरत है। आप मैकेनेकिल इंजीनियर है और पेशे से प्रगतिशीत – उन्नत कृषक है। आप म.प्र. के सामाजवादी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में एक रहे हैं।

विवपुरी के तत्कालीन सांसाद स्व. श्री माधवराज सिंधिया ने तबके कलेक्टर श्री डी. एस. माथुर के सुझाव पर दिव्यांग कल्याण एवं पुनर्वास हेतु मंगलम् संस्था की नींव रखी । यह संस्था तब से ऋग्वेद के उसी मूलमंत्र को आधार बनाकर चल रही थी जो सबको साथ लेकर चलने का आहवान करता है । विवपुरी षहर के लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक साधारण बैठक में इस पुनीत उद्देष्य को लेकर हुये सामूहिक संकल्प से मंगलम् का आकार सुनिष्चित हुआ । इसके पीछे मूल भावना संस्थानीकरण को सार्वजनिक भागीदारी से जोड़ना था । तब से लेकर आज तक इसी ‘सामूहिक चेतना’ का ‘समुच्चय’ बनकर संस्था वंचितों के हित में जनभागीदारी के माध्यम से सेवारत है । स्थापना के समय संस्था के संस्थापक कलेक्टर श्री डी.एस. माथुर के गृहनगर लखलऊ में स्थित ‘मंगलम् इंडिया की एक षाखा के रूप में संचालित रही क्योंकि दिव्यांग जनों के लिए तत्समय काम करने वाली संस्थाओं में यह अग्रणी संस्था थी ।

 एक कलेक्टर के रूप में अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता ने ही श्री डी. एस. माथुर को अपनी पदस्थापना के दौरान इस नवाचार के लिए षिवपुरी को चयनित करने की प्रेरणा दी | श्री माथुर की पहल को बुनियादी संबल क्षेत्रीय सांसद स्व. श्री माधवराव सिंधिया जी ने प्रदान किया जिनके प्रभावी आभा मंडल ने समाज के विभिनन वर्गों को मंगलम् के साथ सक्रियता से जोड़ने का काम किया । बाद में संस्था ने दिव्यांग कल्याण एवं पुनर्वास के अपनी बुनियादी कार्य क्षेत्र का विस्तार किया और स्वतन्त्र संस्था के रूप में पंजीकृत होकर षिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोशण कौषल विकास, प्रषिक्षण, पर्यावरण जैसे विशयों पर षासन एवं जनभागीदारी आधारित विभिन्न प्रकल्प खड़े किये । आज मंगलम षिवपुरी अपने इन्ही सेवा कार्यों के बलबूते पर मध्य प्रदेष के सर्वाधिक प्रतिष्ठित अलाभकारी स्वैच्छिक संगठन के रूप में स्थापित है ।

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